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हर दिन मंदिर में काटी गाय, गिराए दसियों मंदिर: मोइनुद्दीन चिश्ती और उसके शागिर्दों का सच

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होम विविध विषय भारत की बात हर दिन मंदिर में काटी गाय, गिराए दसियों मंदिर: मोइनुद्दीन चिश्ती और उसके शागिर्दों का सच आशीष नौटियाल   | 18 June, 2020 ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती और एमए खान की किताब का कवर अधिकांश सूफी संत या तो इस्लामिक आक्रांताओं की आक्रमणकारी सेनाओं के साथ भारत आए थे, या इस्लाम के सैनिकों द्वारा की गई कुछ व्यापक विजय के बाद। लेकिन इन सबके भारत आने के पीछे सिर्फ एक ही लक्ष्य था और वह था इस्लाम का प्रचार। इसके लिए उलेमाओं के क्रूरतम आदेशों के साथ गाने-बजाने की आड़ में हिन्दुओं की आस्था पर चोट करने वाले ‘संतों’ से बेहतर और क्या हो सकता था? ‘शांतिपूर्ण सूफीवाद’ का मिथक, कई सदियों तक इस्लामिक ‘विचारकों’ और वामपंथी इतिहासकारों द्वारा खूब फैलाया गया है। वास्तविकता इन दावों से कहीं अलग और विपरीत है। वास्तविकता यह है कि इन सूफी संतों को भारत में इस्लामिक जिहाद को बढ़ावा देने, ‘काफिरों’ के धर्मांतरण और इस्लाम को स्थापित करने के उद्देश्य से लाया गया था। इसी में एक सबसे प्रसिद्ध नाम आता है ‘सूफी संत’ मोइनुद्दीन चिश्ती ( Khwaja Moinuddin Chishti ) का, जिन्हें कि हज़रत ख्वाजा गरीब नवा...

इस्लाम का सबसे ख़तरनाक और शातिर चेहरा है सूफ़ीवाद, जानिए पूरा सच

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NewsLoose.com इस्लाम का सबसे ख़तरनाक और शातिर चेहरा है सूफ़ीवाद, जानिए पूरा सच   NewsLoose 3 वर्ष ago बायीं तस्वीर अजमेर के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह की है। यहां पर हर रोज सैकड़ों की संख्या में हिंदू आते हैं और उन्हें पता तक नहीं होता कि वो किसके आगे सिर झुकाने जा रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने कुछ समय पहले  कहा था कि इस्लाम में अगर सूफी मत पर अधिक जोर दिया गया होता तो आतंकवाद नहीं होता। सवाल उठता है कि क्या प्रधानमंत्री का यह बयान सही है। आम धारणा के नजरिए से देखें तो मोदी ने ठीक ही कहा। लेकिन आम सोच के उलट सच्चाई बिल्कुल अलग है। सूफी इस्लाम अमनपसंद है, ऐसी गलतफहमी पूरी दुनिया में फैलाई गई है। पीएम मोदी भी उसी का शिकार हुए होंगे। हाल में आई फिल्म ‘पद्मावत’ के सिलसिले में भी सूफीवाद पर बहस छिड़ी हुई है। कारण ये कि रानी पद्मावती पर अमीर खुसरो ने ‘पद्मावत’ नाम से किताब लिखी थी। अमीर खुसरो अलाउद्दीन खिलजी का दरबारी कवि था और इतिहास में उसे सूफी संत की तरह जाना जाता है। आज भी लोग दिल्ली में अमीर खुसरो की कब्र पर मत्था टेकने के लिए जाते हैं। इनमें बड़ी संख्या हिंदुओं की भी ह...